चंडीगढ़: 102 साल के दुलीचंद की काटी पेंशन, चीख-चीख कर कहा लेकिन अधिकारियों ने...

चंडीगढ़: 102 साल के दुलीचंद की काटी पेंशन, चीख-चीख कर कहा लेकिन अधिकारियों ने नहीं माना,निकाली बारात लिखा-“थारा फूफा जिंदा है’

चंडीगढ़: ‘राजपथ’ का नाम ‘कर्तव्यपथ’ इसलिए रखा गया है कि लोगों को और अधिकारियों को समझ आ सके कि अब राजपथ युग खत्म हो गया और अब कर्तव्यपथ का युग है और ये जितनी जल्दी समझ आ जाए उतना ही अच्छा है। एक ऐसी खबर चंडीगढ़ से आयी है जिसको सुनकर आपको लगेगा की जो हमने लिखा है वो बिलकुल सटीक लिखा है।

चंडीगढ़ के रहने वाले दुलीचंद को अपने जिंदा होने का सबुत देना पड़े तो आप इस पर क्या कहेंगे? हमने सुना तो हमें तो समझ नहीं आया कि क्या कहना चाहिए?  वो चीख-चीख कर कह रहे है कि मैं जिंदा हूँ और अधिकारी है कि मानने को ही तैयार नहीं है कि वो जिंदा है। कई बार पेंशन विभाग के चक्कर काटे लेकिन मजाल है कि सरकारी अफसरों के कानों में जूं तक रेंगी हो।

चंडीगढ़: फिर दुलीचंद का साथ दिया नवीन जयहिंद ने उन दोनों ने मिलकर एक ऐसी तरकीब निकाली कि अधिकारियों को मजबूर होकर मानना ही पड़ा कि दुलीचंद जिंदा है…  नवीन ने दुलीचंद के सिर पर गुलाबी पगड़ी बांध कर दुल्हें को तरह तैयार करके घोड़ी पर बैठा दिया और बैंड बाजों के साथ पूरी बारात को रोहतक के मानसरोवर पार्क से एडीसी ऑफिस तक ले गए और साथ में एक तख्ती भी टांग रखी थी जिस पर लिखा था कि “थारा फूफा जिंदा है”…

चंडीगढ़: ये सब दुलीचंद ने केवल इसलिए किया कि कुंभकरणी नींद में सोए हुए प्रशासन को झकझोर सके। जब वो बारात लेकर एडीसी ऑफिस पहुंचे तब उन्होंने एडीसी महेंद्रपाल और मनीष ग्रोवर को ज्ञापन सौपा।

उसके बाद मनीष ग्रोवर ने संबंधित अधिकारी को फोन कर कहा कि दुलीचंद पेंशन मामले में किस बिंदू पर दिक्कत हुई है पता लगाकर उसका सुधार किया जाए और उनकी पेंशन को शीघ्र चालू करवाने का आदेश दिया।

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By Atul Sharma

बेबाक लिखती है मेरी कलम, देशद्रोहियों की लेती है अच्छे से खबर, मेरी कलम ही मेरी पहचान है।

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