PFI: पीएफआई के सदस्यों को शादी की इजाजत नहीं लेकिन रखते है 72 हूरों की...

PFI:पीएफआई के सदस्यों को शादी की इजाजत नहीं लेकिन रखते है 72 हूरों की चाहत

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PFI: पीएफआई की पैठ देश में इस कदर है कि पूरे देश में करीब 2 लाख से ज्यादा सदस्य इस प्रतिबंधित संस्था की विचारधारा को इस्लामिक अनुयायियों के बीच में, प्रचार और प्रसार करने का काम करती है। पीएफआई एक ऐसी संस्था है जो देश विरोधी कार्यों में लिप्त रही है और ये ही सबसे बड़ा कराण है कि भारत सरकार और सुरक्षा ऐजेंसियों के रडार पर हमेशा से ही रही है।

PFI: ये हम ऐसे ही नहीं कह रहे है उनकी विचारधारा देश की अखंडता के लिए बहुत खतरनाक है। पीएफआई 2047 तक देश को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहता था। देश में आतंकवाद फैलाने के लिए भी लोगों की भर्ती करने काम करता था। ये ही एक कारण था कि भारत सरकार को इस संस्था पर 5 साल के लिए बैन लगाना पड़ा। अब आपको बताते है कि पीएफआई में भर्ती के लिए आपको घर-बहार सबकुछ छोड़ना पड़ता है। शादी करने की भी आपको इजाजत नहीं होती है। लेकिन, 72 हूरों से मिलने की चाहत दिल में हमेशा रहती है, तभी तो उनको बहलाया जाता है कि देश में आतंकवाद फैलाए और अगर शहीद हो गए तो जन्नत में आपको 72 हूरों से मिलना तय है।

भास्कर की खबर के मुताबिक जब उन्होंने जानना चाहा कि  PFI के सदस्य कैसे काम करते है?  इसके बारे में जानने के लिए की PFI की जांच में लंबे समय तक लगे रहे पुलिस और इंटेलिजेंस अफसरों से बात की और संगठन के मुख्य ठिकानों को भी खंगाला तब जाकर PFI की कार्यप्रणाली के बारे में जाकर पता चला कि संगठन में ऐसे काम होता है।

इसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आयी। जांच में सामने आया है कि PFI ने राज्यों में ग्रामीण से लेकर शहरी स्तर तक कई कमेटियां बना रखी हैं। संगठन में नए सदस्य की भर्ती के लिए लोगों को चार चरणों से गुजरना होता हैं। सबके लिए अलग-अलग पैमाने तय किए गए हैं।

PFI: आप को बता दें कि पीएफआई में  ट्रेनिंग देने, ब्रेनवॉश करने और लीगल दांव-पेंच के लिए अलग-अलग कैडर बने हुए हैं। हर कैडर के लोगों की सैलरी भी अलग-अलग है। इलाज से लेकर घर की जरूरत की हर चीज दी जाती है। बाहर भेजने पर अलग से खर्च देते हैं। पकड़े जाने पर सुप्रीम कोर्ट के बेहतर वकील लगाए जाते हैं। संगठन में महिलाओं का भी अलग विंग है।

विवादित संस्था पीएफआई में
 स्थायी सदस्य का दर्जा पाने के लिए आपको 3 स्टेज की ट्रेनिंग पूरी करना जरूरी हो जाता है। स्थायी सदस्य को अपने होम टाउन से बाहर किसी और राज्य में काम करना होता है। वह शादी भी नहीं कर सकता।

सभी सदस्यों को जिम्मेदारी दी जाती है कि वे अपने पड़ोस में रहने वाले 15 घरों को PFI का सदस्य नहीं बनाएंगे, लेकिन उन्हें PFI समर्थक बनाकर उनकी विचारधारा बदलनी ही होगी। उन्हें इस तरह बरगलाना है कि इस्लाम की बात आते ही वे सड़कों पर उतर कर कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हो जाएं।

आपको ऐसा देखने को भी मिला जब भारत सरकार ने विवादित और राष्ट्रविरोधी कार्यों मे शामिल होने के कारण पीएफआई को 5 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया तब हजारों की तदाद में इसके समर्थक सड़कों पर उतर आए थे। और सड़कों पर आगजनी के साथ ही हिंसा भी बड़े पैमाने पर की थी।

PFI: करता है 4 चरणों में काम

स्टेज-1 : मुस्लिम बहुल इलाकों में शाखा खुलवाने का काम 
किसी व्यक्ति को चुनने के बाद 4 महीने तक उस पर नजर रखी जाती है। उसके खानदान की पूरी हिस्ट्री तैयार करवाते हैं। फिर भरोसा होने पर पहली स्टेज का सदस्य बनाते हैं।

बता दें कि  संस्था का सदस्य बनना कोई हसी खेल नहीं है। नजर रखे गए 10 लोगों में से सिर्फ 1 ही कसौटी पर खरा उतर पाता हैं। जो इसको पास कर लेता है वो ही पहली स्टेज के सदस्य बनते हैं। जो स्टेज-1 के सदस्य बन जाते है उन पर जम्मेदारी होती है कि वो मुस्लिम बाहुल्य इलाके में शाखाएं खोलेंगे, लोगों को दवाई-खाना आदि पहुंचाने का काम करने की होती हैं।

स्टेज-2 : 6 महीने काम करके खुद को साबित करना होता है
 और वो ही सदस्य दूसरे स्टेज में जाते है कि जो संगठन के मुताबिक काम करते है। वे PFI और धर्म के कट्‌टरपंथी फॉलोअर बना सकते हैं। इसके बाद ही उन्हें स्टेज-2 में चुना जाता है। इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया के जरिए मैसेज फैलाने से लेकर पुलिस से निपटने तक की ट्रेनिंग दी जाती है। आपको पुलिस पर कैसे दबाव बनाना है ये सिखाया जाता है।

स्टेज-3 : महाराष्ट्र और केरल में PFI का गढ़ है और यहीं पर 3 महीने की ट्रेनिंग करवाते हैं
 यहां पहुंचने लोग वाले स्थायी सदस्य हो जाते हैं। उन्हें अपना घर और जिला छोड़ना पड़ता है। इसके बाद उन्हें सैलरी और भत्ते मिलने शुरू होते हैं। वर्दी मिलती है। इस दौरान उन्हें पूरा घर खर्च मिलता है। संगठन के विस्तार की ट्रेनिंग दी जाती है।

स्टेज-4 : स्टेज 4 के सदस्यों पर ही संगठन के लिए फंड उगाही की जिम्मेदारी होती है उनको ही ये कार्य दिया जाता है कि विदेशों से संगठन के लिए फंड लान का काम करते है और साथ ही फंड को व्यवस्थित करने का काम होता है।

PFI: गौरतलब है कि केंद्र सरकार के PFI पर में देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण बैन लगा दिया था और अब ट्विटर इंडिया ने भी PFI के ट्विटर अकाउंट को बैन कर दिया है।

आप को बता दें कि टेरर लिंक के सबूत मिलने के बाद पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर भारत सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए मंगलवार (27 सितंबर) देर रात को इस आतंकी संगठन पर 5 साल तक के लिए बैन लगा दिया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पीएफआई के अलावा 8 सहयोगी संगठनों को भी पांच साल के लिए बैन कर दिया गया है।

PFI: भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने पीएफआई पर बैन लगाने के संबंध में अधिसूचना बाद कहा था कि ”पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के नेता हैं।  जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) से इसके संबंध हैं। आप को बता दें कि सिमी और जेएमबी दोनों ही प्रतिबंधित संगठन हैं।”

PFI: अधिसूचना में आगे ये भी कहा गया, ”‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ (ISIS) जैसे आतंकी संगठनों के साथ पीएफआई के संबंधों के कई मामले सामने आए हैं। पीएफआई और उसके सहयोगी या मोर्चे देश में असुरक्षा की भावना फैलाने के लिए एक समुदाय में कट्टरपंथ को बढ़ाने के लिए खुफिया तरीके से काम कर रहे हैं।”

अधिसूचना आगे ये भी कहा कि “जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पीएफआई के कुछ कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। उक्त कारणों और पीएफआई की गतिविधियों को देखते हुए उसे और उसके सहयोगियों या मोर्चों को तत्काल प्रभाव से गैरकानूनी संगठन घोषित करना जरूरी है। आतंकवाद रोधी अधिनियम की धारा-3 की उपधारा (3) में दिए गए अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे गैर-कानूनी घोषित किया जाता है।’’

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By Atul Sharma

बेबाक लिखती है मेरी कलम, देशद्रोहियों की लेती है अच्छे से खबर, मेरी कलम ही मेरी पहचान है।

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