Uttar Pradesh: आज से अवैध महरसों का सर्वे शुरू, कमेटी 12 बिंदुओं पर मदरसे को...

Uttar Pradesh: अवैध मदरसों का सर्वे शुरू, कमेटी 12 बिंदुओं पर करेगी जांच, 25 अक्टूबर तक जमा करनी होगी रिपोर्ट

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Uttar Pradesh: देश में जिहादी चला रहे आतंकी पाठशाला, जंहा बच्चो को बनाया जाता है आतंकी और वहां उनका किया जाता है ब्रैनवॉश, और शिक्षा के नाम पर ज्यादतर जिहादी इन मासूम बच्चो का इस्तेमाल करने की कोशिश करते है आतंक को फैलाने के लिए… सिर्फ इतना ही नहीं मदरसों में पढ़ाया जाता है कि अगर किसी अन्य तरीके से पूजा-प्रार्थना होती है तो यह अधर्म होगा।

यह भी कहा जाता है कि ऐसा करने वाले को सजा देने का अधिकार भी उन्हें है। मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को यह तक सिखाया जाता है कि मुस्लिम दुनिया में दूसरे धर्म के लोगों पर शासन करने के लिए पैदा हुए हैं।

Uttar Pradesh: अब इन मदरसों पर चलेगा योगी का हंटर और अब गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर नकेल कसने के लिए योगी ने कमर कस ली है, लेकिन ‘अवैध’ शब्द यूपी की योगी सरकार में बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका ताज़ा उदाहरण ही योगी सरकार का नया फ़ैसला है। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के गैर मान्यता प्राप्त मदरसों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति जांचने के BJP लिए उनका सर्वे कराने का फैसला लिया है।

लेकिन जब से योगी के रडार पर ये अवैध मदरसे आये हैं तबसे इनके मौलानाओ के सीने पर सांप लोट रहे हैं, अब जो सर्वे किया जाएगा। उसको 12  बिंदुओं पर परखा जाएगा।

Uttar Pradesh: 15 अक्टूबर तक जिला स्तर पर सर्वे पूरा कर 25 अक्टूबर क शासन को रिपोर्ट भेजनी है। और सरकार की ओर से जारी किए गए फॉर्मेट में सर्वे के 12 बिंदु तय किए गए हैं। इन्हें पैसे कहां से आते हैं? पाठ्यक्रम क्या है? इन सवालों के दायरे में यूपी में चलने वाले 16 हजार निजी मदरसे होंगे।

Uttar Pradesh: इसके लिए 10 सितंबर तक टीम गठित करने का काम खत्म कर लिया गया है। यही टीम मदरसों की स्थिति का सर्वे करेगी। टीमों को आदेश के मुताबिक 15 अक्टूबर तक सर्वे पूरा कर लेना है। ये टीमें 25 अक्टूबर तक अपनी सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंप देंगी।

पहला: दिए गए फॉर्मेट में बनाए गए 12 कॉलम में पहला कॉलम मदरसे का नाम से भरा जाएगा।

दूसरा: मदरसे को संचालित करने वाली संस्था का नाम इसमें भरा जाएगा।

तीसरा: मदरसा के स्थापना वर्ष के बारे में विवरण भरना होगा।

चौथा: फॉर्मेट के चौथे कॉलम में मदरसों की अवस्थिति का पूरा विवरण देना होगा। मतलब, मदरसा निजी भवन में चल रहा है या किराए के भवन में। इसकी जानकारी देनी होगी।

पांचवीं: क्या मदरसे का भवन छात्र-छात्राओं के लिए उपयुक्त है? इस सवाल का जवाब देना होगा। इसमें बताना होगा कि मदरसे का भवन सुरक्षित है या नहीं। इसके अलावा पेयजल, फर्नीचर, बिजली की व्यवस्था, शौचालय आदि सुविधाओं के बारे में बताना होगा।

छठा: सर्वे फॉर्मेट के छठे कॉलम में मदरसे में पढ़ रहे छात्र- छात्राओं की कुल संख्या के बारे में जानकारी देनी है।

सातवां: मदरसे में कुल शिक्षकों की संख्या क्या है? इसका विवरण देना है।

आठवां: मदरसे में लागू पाठ्यक्रम क्या है? मतलब, किस पाठ्यक्रम के आधार पर बच्चों को शिक्षा दी जा रही है, इसकी जानकारी ली जाएगी।

नौवां: मदरसे की आय का स्रोत क्या है? इसमें यह बताना होगा कि मदरसा को संचालित करने के लिए दान या जकात मिल रही है तो वह कहां से आ रह है।

दसवां: क्या इन मदरसों में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं किसी और शिक्षण संस्थान स्कूल में नामांकित हैं? मतलब छात्रों के अन्य संस्थानों में भी एडमिशन लिए जाने के बारे में जानकारी ली जाएगी।

ग्यारहवां: क्या किसी गैर सरकारी संस्था या समूह से मदरसे की संबद्ध है? अगर हां तो इस संबंध में पूरा विवरण होगा।

बारहवां: यह कॉलम अभियुक्ति का होगा। इसमें सर्वेयर तमाम बिंदुओं पर मदरसा संचालकों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर अपनी टिप्पणी लिख सकते हैं।

Uttar Pradesh:  वही सर्वे के तीन प्वाइंट ही ऐसे हैं, जो मदरसा संचालकों की परेशानी बढ़ा सकती है। यह प्वाइंट हैं, आठवां, नौवां और ग्यारहवां। मतलब, मदरसा में पाठ्यक्रम को लेकर कोई एक निर्धारित फॉर्मेट नहीं है।

कई मदरसों से बच्चों के बीच कट्टरपंथी सोच के विकास की बात कही जाती रही है। ऐसे में सिलेबस को लेकर सबसे अधिक दबाव में मदरसा संचालक बताए जा रहे हैं।

यूपी सरकार मान्यता प्राप्त मदरसों को अनुदान देती है मगर कई ऐसे भी मदरसे हैं जिन्हें मान्यता नहीं है। 7442 मान्यता प्राप्त मदरसों में करीब 19 लाख छात्र पढ़ते हैं।

औसतन एक मदरसे में करीब ढाई सौ बच्चे हैं। सरकार का मानना है कि अगर 20 हजार गैर मान्यता प्राप्त मदरसे भी मान लिए जाएं तो प्रत्येक में बच्चों की संख्या 50 मानी जाए तो तकरीबन 10 लाख बच्चे वहां पढ़ रहे हैं।

आपको बता दे की देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसे पहले से ही चल रहे हैं। उसी के उलट ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों की भी संख्या बढ़ गई है।

इस ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों की आड़ में यहां अनेकों अवैध काम होते हैं और इसकी शिकायतें और सूचनाएं भी सरकार को खूब मिल रही थीं। ऐसे में सरकार की ओर से यह बड़ा कदम उठाया गया है।

ध्यान देने वाली बात है कि जिन तथाकथित मदरसों को मान्यता ही नहीं मिली, उन्हें “मदरसा” करार नहीं किया गया तो वह “मदरसे” के नाम पर चल क्यों रहे हैं? और कौन सी संस्था इन्हें चला रही है। कौन है जो इन मदरसों को फंडिंग कर रहा है ? और सबसे बड़ी बात यंहा पढ़ने वाले बाचो को पढ़ाया क्या जाता है ?

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में इस वक्त कुल 16,461 मदरसे हैं, जिनमें से 560 को सरकारी अनुदान दिया जाता है. प्रदेश में पिछले छह साल से नए मदरसों को अनुदान सूची में नहीं लिया गया है।

हाल के दिनों में जिहादी नेटवर्क के विरुद्ध असम पुलिस की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। घनी मुस्लिम आबादी वाला यह इलाका बांग्लादेश से जुड़े आतंकियों और जिहादी मॉड्यूल के लिए सुरक्षित ठिकाना है। यहां मदरसे की आड़ में जिहादी गतिविधियां चलाई जा रही थीं।

जिसके बाद राज्य सरकार ने अब तक तीन मदरसों को गिरा दिया , जबकि चौथे मदरसे को स्थानीय लोगों ने ही गिरा दिया। क्यूंकि ये मदरसे आतंकवाद की शिक्षा का केंद्र बन गया था और यहां अलग कायदा से जुड़े आतंकी पनाह पाते थे और लोगों को देश विरोधी काम अंजाम देने के लिए भड़काने का काम करते थे।

असम के बारपेटा जिले में अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के दो बांग्लादेशी सदस्यों को चार साल तक पनाह देने वाले एक मदरसे को जिला प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद बोंगाईगांव जिले के कबाईटरी पार्ट- IV गांव में स्थित मरकजुल मा-आरिफ क्वारियाना मदरसा को तोड़ा गया था।

अब इसी कड़ी में एक और मदरसे पर योगी का बुलडोजर चला है, अमेठी में चार साल से सुल्तानपुर- रायबरेली राजमार्ग के किनारे गूजरटोला गांव के पास चारागाह की बेशकीमती जमीन पर बने मदरसे को तहसीलदार कोर्ट से बेदखली के बाद बुलडोजर से ढहा दिया गया।

महज सिर्फ 35 मिनट में ही मरदसे को जमींदोज़ कर दिया,,,,,चार कमरों के मदरसा को पुलिस पीएसी के साथ पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने ढहा दिया। गूजर टोला ग्राम पंचायत अंतर्गत सुल्तानपुर रायबरेली राजमार्ग के बाई तरफ चारागाह की विश्व बेशकीमती जमीन पर गांव निवासी हसन पुत्र सुल्तान ने निर्माण कार्य करा रखा था।

4 कमरों और बरामदे के इस भवन में 2 साल पहले तक मदरसा चल रहा था। भूखंड से थोड़ी दूर पर एक सरकारी हैंडपंप भी लगा हुआ था। मदरसे के बहाने पूरे भूखंड पर अवैध कब्जे की कोशिश की जा रही थी। जमीन हाईवे से सटी होने के नाते करोड़ों की बताई जा रही है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह सर्वे मुस्लिम बच्चों की भलाई के लिए है। मदरसों में सैलरी कैसे दी जा रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है, इन सभी बातों की जानकारी राज्‍य को होना आवश्‍यक है। सरकार को पता होना चाहिए कि ग्राउंड पर क्या चल रहा है, तभी वह उनकी खुलकर मदद कर सकती है।

वास्‍तव में योगी सरकार अल्पसंख्यक समाज और मुस्लिम युवाओं की भलाई के लिए लगातार काम कर रही है। यह आज सभी को न केवल समझना होगा बल्‍कि इसे खुले मन से स्‍वीकारना भी होगा। हर विषय को राजनीति से जोड़ देना ठीक नहीं। लेकिन सवाल अभी भी यही है की आखिर ये गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को चलाने वाला मास्टरमाइंड कोन है?

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By Atul Sharma

बेबाक लिखती है मेरी कलम, देशद्रोहियों की लेती है अच्छे से खबर, मेरी कलम ही मेरी पहचान है।

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