Cheating Story: विदेश जाकर बहुऐं तोड़ रहीं नाता, खेत बेचकर भेजा कनाडा जाते..

Cheating Story: विदेश जाकर बहुऐं तोड़ रहीं नाता, खेत बेचकर भेजा कनाडा जाते ही भूली: पति ने की आत्महत्या

Cheating Story

Cheating Story: पंजाब से ऐसी कहानी जिसे पढ़ आपके होश उड़ जायेंगे साहब! माता- पिता दिन रात मेहनत कर बच्चों का भविष्य बनाने में लगे रहते हैं। ये अपने भारत देश के लोग जी तोड़ मेहनत कर अपनी पैतृक संम्पत्ति को बचाने के लिए अपनी देह तक को मिट्टी में मिला देते हैं, परंतु अपनी संम्पत्ति को खोना नहीं चाहते लेकिन बात जब बच्चों के भविष्य बनाने पर आ जाये तो खून- पसीना बहाकर बचाई अपनी जमीन को भी दाव पर लगा देते हैं।

पढ़िए एक परिवार की दर्द भरी दास्तां

पंजाब का गांव कोठे गोविंदपुरा जहां लवप्रीत सिंह नाम के युवक की सालभर पहले अपने ही खेत में जहर पीकर, खून की उल्टियां करते हुए मौत हो गई। 25 साल के इस लड़के ने खुदकुशी की, क्योंकि विदेश जा चुकी पत्नी उससे बात करने से इनकार कर चुकी थी।

लवप्रीत ने जब उन 35 लाख रुपए का हवाला दिया, जो उसके परिवार ने लड़की को कनाडा भेजने पर खर्च किए थे, तो उसने वॉट्सऐप से लेकर हर जगह से ब्लॉक कर दिया। नंबर भी बदल डाला। ससुराली रिश्तेदार गायब।

बेहद हंसमुख और मेहनती लड़का भीतर ही भीतर घुलने लगा। वो मानसून की शुरुआत थी, जब खेतों में काम के बहाने गया और जहर पी लिया।

लवप्रीत के चाचा हरविंदर सिंह से ने बताया, साल 2019 में लवप्रीत की शादी एक रिश्तेदार के जरिए हुई। बीन्त कौर आम बच्चियों जैसी ही थी बेहद प्यारी। हंसी-मजाक करने और घर में चिड़िया की तरह डोलने वाली।

उसने कनाडा जाने के लिए अंग्रेजी (IELTS) का एग्जाम दिया। इसमें नंबरों की मार्किंग बैंड से होती है। विदेश जाने के लिए इस तरह की परीक्षा पास करना जरूरी है। बीन्त परीक्षा पास कर गई, लेकिन हमारे लाडो (लवप्रीत) के नंबर नहीं आ सके।

Cheating Story:  आगे बताया कि हमने खेत का बड़ा टुकड़ा बेचकर 35 लाख रुपए जुटाए और बीन्त को अगस्त 2019 में कनाडा भेज दिया। बस, यहीं से कहानी बदल गई। हरदम हंसकर बात करने वाली उस लड़की ने लाडो का फोन उठाना बंद कर दिया।

जब वो बार-बार फोन करता तो झल्लाती हुई एक लाइन लिखती- यहां बहुत काम रहता है। मैंनू चैन से जीने दे। कभी वो पढ़ाई करती होती, कभी ट्रैवल, कभी काम। सब हो जाए तो सोने का वक्त हो जाता। दोनों जगहों के टाइम-जोन में भी फर्क था। लाडो की आंखें अंदर धंसना शुरू हो गईं।

लवप्रीत के चाचा ने आगे क्या बोला?

चाचा बोले कि, लाडो (लवप्रीत) ने पता ही नहीं लगने दिया और आत्महत्या कर ली। मौत के बाद जब पोस्टमार्टम हुआ, तब पता चला कि उसने जहर खाया था। उधर लड़की का फोन लग नहीं रहा था। उसके घरवाले चुप्पी साधे हुए थे। लाडो का फोन खुलवाया तो पता लगा कि महीनों से सब कुछ बिगड़ा हुआ था।

लवप्रीत व बीन्त कौर की वाह्टसप चैट
लवप्रीत व बीन्त कौर की वाह्टसप चैट

वो लंबा-लंबा वाह्टसप पर लिखा करता। बीन्त जवाब तक नहीं देती। या देती भी तो हां-हूं से ज्यादा नहीं। यहां तक कि लाडो गिड़गिड़ाते हुए उससे ये तक कहने लगा कि कनाडा भले न बुलाए, लेकिन रिश्ता न तोड़े। पर उसे ‘कनाडा की हवा’ लग गई थी। चैट में ही लाडो ने सुसाइड की बात कही तो उधर से अंगूठे का निशान आ गया। जिसे लवप्रीत सह नहीं सका!

पिता बोलने के साथ ही रो पड़ते हैं

लवप्रीत के पिता बलविंदर सिंह जो बात करते हुए फफककर रो देते हैं। 6 फुट से भी ऊंचा-तगड़ा ये पिता फसलों पर, पॉलिटिक्स पर तगड़ी राय रखता है, लेकिन जैसे ही लाडो का जिक्र आता है, कमजोर हो रो पड़ते हैं। लवप्रीत के पिता आंसू पोंछते हुए ही कहते हैं- लाडो की मां डिप्रेशन में रहती है। इकलौता बेटा चला गया। दवा खाती है और वक्त काटती है।

लवप्रीत ही नहीं ऐसे तमाम परिवार हैं पंजाब में

पंजाब के दो जिले बठिंडा और बरनाला में कई बार सुनाई पड़ा। उन पतियों से, जिनकी बीवियां गायब हो गईं। उन मांओं से जिनके बेटे शादीशुदा होकर भी अकेले हैं। उन पिताओं से भी, जिन्होंने कनाडा के पंजाबी ख्वाब के लिए अपने खेत, जमीनें बेच दीं।

बठिंडा जिले के कोठे बकरियां वालां गांव के एक परिवार ने IELTS देकर ‘तड़-तड़ अंग्रेजी बोलती’ अपनी बहू पर तकरीबन 65 लाख रुपए लगा दिए। सपना था कि कुड़ी बेटे को भी साथ ले जाएगी। हम मिट्टी में मिट्टी हो गए। उसे नहीं होने देना है। यही सोच रखा था, लेकिन कहां पता था वो ऐसी निकलेगी। नाम-चेहरा न दिखाने की शर्त पर बकरियां वालां का पीड़ित परिवार बताता है- बहू ने न पैसे लौटाए, न बेटे को बुलाया।

कनाडा ही क्यों जाती हैं बहुऐं?

Cheating Story:  कनाड़ा का इमिग्रेशन रूल ढीला है। परमानेंट रेजिडेंसी जल्दी मिल जाती है। फिर वहां तकरीबन हर घर से कोई न कोई है। बच्चा जाएगा तो रिश्तेदारी में रहेगा। सुरक्षित रहेगा। पढ़ाई खत्म करते ही लोग नागरिकता के लिए अप्लाई कर देते हैं, फिर चाहे ट्रक चलाना पड़े या झाड़ू-पोंछा करना पड़े।

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By Rohit Attri

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