Emergency: 25 जून 1975 का वो काला दिन जिसे सुन लोग आज भी सिहर उठते हैं

Indira Gandhi

Emergency: 47 वर्ष पहले आज ही के दिन 25 जून 1975 का वो काला दिन जिसने लोगों की बढ़ती रफ्तार को स्थिर कर दिया था। लोगों की अच्छी खासी चलती जिंदगी में ब्रेक सा लग गया था, लोग घरों में कैद हो गये थे। इस दौरान देश के नागरिकों के मूल अधिकारों को छीन लिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की रात को 12 बजे से देश में आपातकाल लाद दिया था। आपातकाल का यह दौर 21 महीने तक चला था और उस समय हुई कई घटनाओं ने आपातकाल की पटकथा लिखी थी।

आपातकाल लगने की किस-किस को थी जानकारी

25 जून 1975 को जब इमरजेंसी लगी, हरिदेव जोशी राजस्थान के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। आपातकाल लगाने से कुछ घंटों पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनसे बात करना चाहती थीं। वरिष्ठ पत्रकार विजय भंडारी ने राजस्थान के राजनीतिक घटनाक्रम पर आधारित किताब ‘राजस्थान की राजनीति, सामंतवाद से जातिवाद के भंवर में’ में इस घटना का विस्तार से उल्लेख किया है।

पत्रकार भंडारी ने लिखा है, 25 जून 1975 को मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी बांसवाड़ा में अपने छोटे बेटे सुरेश जोशी के शादी समारोह में मेहमानों के स्वागत में लगे थे। उसी वक्त मध्यप्रदेश के CM पी.सी सेठी स्पेशल प्लेन लेकर हरिदेव जोशी को लेने बांसवाड़ा पहुंच गए। सेठी के पास मैसेज था- PM इंदिरा गांधी CM जोशी से गोपनीय बात करना चाहती हैं।

इंदिरा गांधी
इंदिरा गांधी

Emergency: उस समय फोन की सुविधा केवल जयपुर में थी, जो बांसवाड़ा से करीब 500 किलोमीटर से ज्यादा दूर था। मध्य प्रदेश के तत्कालीन सीएम पीसी सेठी ने सीएम हरिदेव जोशी को जो मैसेज दिया, उसमें साफ मेंशन था- मामला कॉन्फिडेंशियल और अर्जेंट है।

जोशी ने बेटे की बारात की निकासी करवाकर तोरण तक पहुंचाया और फिर चुपचाप स्पेशल प्लेन में बैठ जयपुर के लिए रवाना हो गए। जयपुर पहुंचकर फोन पर पीएम इंदिरा गांधी से बात की और वापस बांसवाड़ा के लिए रवाना हो गए। इंदिरा गांधी और हरिदेव जोशी के बीच उस रात क्या बात हुई, इसका आधिकारिक ब्यौरा किसी के पास नहीं है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इंदिरा गांधी ने हरिदेव जोशी को इमरजेंसी लागू करने के दौरान उठाए जाने वाले कदमों और इस बारे में पहले से तैयारी रखने के लिए कहा था।

इस तर्क का आधार भी है, क्योंकि फोन पर हुई इस बातचीत के कुछ घंटों के बाद ही रात 12 बजे से इमरजेंसी लागू कर दी गई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने इंदिरा गांधी को रख दिया था हिलाकर

Emergency: 1971 के लोकसभा चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के नेता राजनारायण रायबरेली में इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे थे। इंदिरा गांधी से चुनाव हारने के बाद राजनारायण इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर इंदिरा गांधी पर चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। देश के इतिहास में बार किसी मामले में प्रधानमंत्री को हाईकोर्ट में पेश होना पड़ा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा ने 12 जून, 1975 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इंदिरा गांधी को दोषी ठहराया। उन्होंने रायबरेली से इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया। यही नहीं उनकी लोकसभा सीट रिक्त घोषित करने के साथ उन पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लगा दी। इसी घटना ने इंदिरा गांधी को अंदर तक हिलाकर रख दिया था।

एक नेता ने दी थी इमरजेंसी की सलाह

देश में चल रही भारी राजनीतिक उठापटक, बढ़ रहे राजनीतिक विरोध और कोर्ट के आदेश के चलते इंदिरा गांधी गहरी मुसीबत में फंस गई थीं। ऐसी स्थिति में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धार्थ शंकर रे ने इंदिरा गांधी को देश में आपातकाल घोषित करने की सलाह दी। कुछ जानकारों का कहना है कि संजय गांधी ने भी अपनी मां को इसके लिए तैयार किया। सिद्धार्थ शंकर रे ने ही इमरजेंसी लगाने के संबंध में मसौदे को को अंतिम रूप दिया था।

आपातकाल
आपातकाल

मनमानी सत्ता की स्थापना

आपातकाल के दौरान देश के सभी प्रमुख नेताओं को जेल के अंदर डाल दिया गया। लोगों की जबरन नसबंदी का मामला भी खूब उभरा। आपातकाल के दौरान इंदिरा सरकार ने लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा कर मनमानी करने वाली सत्ता की स्थापना की थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(R.S.S) से जुड़े लोगों को इंदिरा गांधी के जबर्दस्त कोप का सामना करना पड़ा और काफी संख्या में स्वयंसेवक जेलों में डाल दिए गए।

कांग्रेस की आलोचना करने वालों को खूब किया प्रताड़ित

लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी बाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, सुरेंद्र मोहन और प्रकाश सिंह बादल जैसे नेताओं को जेल में डाल दिया था। इंदिरा गांधी के इस मनमानी वाले रवैये के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ता रहा और फिर 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी को जनता पार्टी के हाथों भारी पराजय का सामना करना पड़ा।

Emergency: कई दलों ने मिलकर जनता पार्टी का गठन किया था और मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री पद की कमान सौंपी गई। हालांकि, यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और अपने अंतर्विरोधों के कारण जल्द ही सत्ता से बेदखल हो गई और 1980 में एक बार फिर इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हो गई।

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By Rohit Attri

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