Hindu refugee: बेटियों को उठाते जबरन निकाह रचाते, यहाँ सुकून है साहब; हरा..

Hindu refugee: बेटियों को उठाते जबरन निकाह रचाते, यहाँ सुकून है साहब; हरा पासपोर्ट देख बस कोई काम नहीं देता

हिंदू शरणार्थी

Hindu refugee: पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत भागे हिंदुओं ने गुजरात- राजस्थान के अलावा दिल्ली के कई इलाकों में शरण ले रखी है। हिंदू शरणार्थी मलबे के लगे के ढ़ेंरों के सहारे झाड़ बुहारकर झुग्गियां डालकर अपना जीवन यापन किस तरह कर रहे हैं। उसके बारे में बतायेंगे। पाकिस्तान से धार्मिक वीजा पर आये हिंदू शरणार्थियों को यहां काम नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से बेहद परेशान हैं, लेकिन भारत में रहकर वह फिर भी खुश हैं, बस इंतजार है तो यहां की नागरिकता मिलने का।

वहां क्या होता था?

एक हिंदू शरणार्थी की बात सुनकर रूंह कांप गईं, उसने बताया कि पाकिस्तान में बच्चियों का कोई रखवाला नहीं। कोई भी उठा ले जाएगा और उसके बाद खबर तक नहीं मिलेगी। बच्ची के नाम से लेकर पहचान सब कुछ बदल दिया जाएगा और निकाह कर लिया जाता है। विरोध करो तो बाकियों का भी वही हाल होगा। हमारी औरतें बाहर नहीं निकल पाती थीं, चाहे जितनी उम्र की हों। सब्जी या एक माचिस भी लानी हो, तो हमारे लौटने का इंतजार करतीं। खतरा हर दिन के साथ बढ़ रहा था। हमने धार्मिक वीजा बनवाए और निकल भागे।

यहां कितनी भी परेशानियां हों साहब, वहां से फिर भी अच्छे हैं

एक हिंदू शरणार्थी बताता है, कि यहां कई तकलीफें हैं। बिजली नहीं। पानी नहीं। मच्छर जान ले लेते हैं। यहां हमारे बच्चे सांप-बिच्छुओं के बीच सोते हैं। काम मिलता नहीं, क्योंकि यहां की पहचान नहीं है, हमने पाकिस्तान का नमक खाया है, न लेकिन तब भी पहले से ठीक हैं। मच्छर खून पिएगा, ज्यादा से ज्यादा मलेरिया ला देगा। गंदा पानी पीकर पेट ही खराब रहेगा। तो क्या! हमारी औरतें-बच्चे तो बिना डर.. जी रहे हैं।

Hindu refugee: 6 साल पहले धार्मिक वीजा पर भारत पहुंचे एक हिंदू शरणार्थी बताता है, कि वह लगातार वीजा बढ़ा रहे हैं, क्योंकि वापस नहीं लौटना चाहते। जेल से छूटे लोग आजादी का असल मतलब जानते हैं। हम भी एक किस्म की जेल से निकलकर आए। घर के कोने में देवी-देवताओं की छोटी-छोटी तस्वीरें सजाकर रोज पूजा-पाठ करते वे खुश तो हैं, लेकिन सुखी यहां भी नहीं। तेज हवा चलती है, तो घर की छत उड़कर कई मीटर दूर जा गिरती है। न पक्का घर बना सकते हैं, न पक्का काम खोज सकते हैं। पाकिस्तान छूटा, लेकिन वहां की पहचान नहीं छूटी।

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By Rohit Attri

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