China-Taiwan Crisis: चीन की दादागिरी को देखते हुए भारत और अमेरिका समेत 17 देशों ने दी चीन को लास्ट वार्निंग

China-Taiwan Crisis: चीन की दादागिरी को देखते हुए भारत और अमेरिका समेत 17 देशों ने दी चीन को लास्ट वार्निंग

China-Taiwan Crisis

Written by Aniket Sardana..

China-Taiwan Crisis: अमेरिका की राजनीतिज्ञ नैन्सी पेट्रीसिया के ताइवान के दौरे के बाद चीन को चुनूने काटने लगे हैं।आपको बता दें कि ड्रैगन ने ताइवान के समुद्र और हवाई क्षेत्र में मिसाइलें दागी थी और बैटलशिप तथा लड़ाकू विमान भेजे थे।

जिससे ताइवान के पसीने छूटने लगे है और ताइवान ने विश्व के 17 देशो से मदद की गुहार लगाई और उसकी गुहार का नतीजा भी ये हुआ कि चीन ने सैन्याभ्यास तो रोक दिया है लेकिन ताइवान के डिफेंस क्षेत्र में लगातार अपने लड़ाकू जेट भेज रहा है।

China-Taiwan Crisis: वहीं अमेरिका ने कह दिया है कि वो किसी भी हद तक जाकर ताइवान की रक्षा करेगा। अब ड्रैगन को जवाब देने के लिए अमेरिका के साथ भारत भी आ गया है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि 17 देश मिलकर ड्रैगन पर नकेल कसेंगे।

ये सारे देश आसमान में अपनी ताकत दिखाएंगे और चीन को अंतिम चेतावनी देंगे कि अगर उसने अपनी मनमानी की तो उसको भी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी… जिसका अंदाजा उसको सपने में भी नहीं होगा।

China-Taiwan Crisis: दरअसल, रूस, चीन और अमेरिका के बीच जारी खींचतान से, विश्व में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। इन सबके साथ ही भारत और चीन की सीमा फिलहाल शांत जरूर है लेकिन अंदर ही अंदर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में ये युद्धाभ्यास को सीधे तौर पर चीन के खिलाफ माना जा रहा है। वैसे भी चीन को काबू में करना बेहद ही जरूरी है।

गौरतलब है कि चीन को सबक सिखाने के लिए ऑस्ट्रेलिया के समुद्री इलाके में युद्धाभ्यास शुरू हो गया है। जिसमे, अमेरिका, ब्रिटेन और भारत समेत 17 देश शामिल हुए। इस युद्धाभ्यास में 100 फाइटर जेट शामिल है। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स की अगुआई में इस मेगा वॉर ड्रिल का आयोजन किया है, जिसमें 17 देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं।

China-Taiwan Crisis: ये मेगा वॉर ड्रिल 19 अगस्त से शुरू होकर 6 सितंबर तक चलेगी। इस वॉर ड्रिल में जर्मनी के लड़ाकू विमान भी हिस्सा लेंगे। भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया की वायुसेना भी इस बड़ी वॉर ड्रिल में हिस्सा लेगी। इसमें 100 लड़ाकू विमान और 2500 सैन्य बल शामिल होंगे।

यह युद्धाभ्यास कई तरह से मायने रखता है। क्योंकि, दुनिया में इस वक्त कई देशों के बीच हालात नाजुक चल रहे हैं। उधर यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग से अभी दुनिया रोकने में सफल नहीं हुई थी कि अब ताइवान पर हमला करने के लिए चीन पूरी तरह से तैयारी कर रहा है। ऐसे में यह सैन्याभ्यास बेहद ही अहम होने जा रहा हैं।

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