Equalized: 19 साल की महिला खिलाड़ी के पति का आरोप, पीरियड्स के बहाने फरमाती है आराम, थके हुए पति को कैसे मिलेगी चाय

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Equalized: हाल में पेरिस के फ्रेंच ओपन से एक तस्वीर आई है, जिसमें खिलाड़ी आंखे मीचे हुई दिख रही है, उसे कुछ लोग संभाल रहें हैं। 19 साल की ये टेनिस खिलाड़ी झेंग किनवेन हैं। जिन्होंने कहा कि काश मैं मर्द होती तो शायद हारती नहीं, हारने की सिर्फ इतनी सी वजह की पीरियड्स के दर्द से तड़प रही महिला ने हार माान ली।

Equalized: उस महिला ने हारने के बाद कहा कि काश मै मर्द होती तो न पीरियड्स होते और न मैं हारती। झेंग के मुताबिक वो पीरियड्स का उनका पहला दिन था, जब एठती हुई नसों और पेट दर्द के साथ उन्हें खेलना पड़ा।

Equalized: दरअसल, इस मैच में का पहला सेट झेंग जीत गई थीं, लेकिन अगले दो सेटों में उन्हें हार का सामना कराना पड़ा। इससे वर्ल्ड नंबर वन प्लेयर को हराने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका।

Equalized: लेकिन एक मर्द को यह बात ललकार की तरह लगती है, जिससे करीब सारी सारी महिलाएं गुजरती हैं। लेकिन मर्दाना दिमाग इस दर्द को ढकोसला समझता है। 

सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे- आजकल की लड़कियां दर्द का नखरा करती हैं। कोई लिखने लगा- इतनी ही तकलीफ होती है तो खेलने क्यों निकली, घर बैठ जाती! कोई लिखने लगा- हमारी मांओं ने तो कभी खाना पकाने या कपड़े फींचने को लेकर ऐसी बहानेबाजी नहीं की।

एकदम सही बात! लड़कियां दर्द के चोंचले करती हैं और लगातार कर रही हैं। मियां प्यारे दफ्तर में हाड़तोड़ काम निबटा लौटते हैं तो चाय की प्याली की बजाय बिखरा हुआ घर मिलता है। रसोई पुराने कटे प्याज की गंध से महमहा रही है। एक तरफ अनधुले कपड़ों का छोटा-मोटा पहाड़ खड़ा है, दूसरी तरफ बच्चों की टोली नाक बहाती हुई आपस में गुंथी हुई है। इधर कमरे का किवाड़ सटाए बीवी सो रही है। वजह? उसे पीरियड्स आए हैं। जब शौहर खाना पकाएगा, तब जाकर वो उठेगी।

ये नखरा दो-एक दिनों तक चलेगा और तब तक चलता रहेगा, जब मेनोपॉज न आ जाए। इसके बाद हड्डियों की चटचटाहट का शोर गूंजने लगेगा। बीते जमाने के मर्द समझदार थे, वो जानते थे कि औरतों को एक बार रोने की छूट मिले तो वो अमीर के पेट की तरह पसरती ही चली जाएंगी

इसलिए उन्होंने दर्द की दवा खोजने तक पर रोक लगी दी। साल 1590 से लेकर अगले एक साल तक स्कॉटलैंड में ऐसी औरतों की खोज चली जो दर्द का इलाज करती थीं। जो जंगलों में ऐसी बूटी खोजतीं, जो दर्द खींच सके। या रसोई में वो शोरबा पकातीं, जो औरत को ताकत दे।

ये 21वीं सदी है, लेकिन हालात अब भी खास अलग नहीं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की साल 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल अब भी जनाना-मर्दाना दर्द में भेद करते हैं। अगर कोई औरत इमरजेंसी रूम में दर्द की शिकायत के साथ पहुंचती है तो उसे लंबा इंतजार कराया जाता है, जबकि मर्दों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए लगभग तुरंत इलाज शुरू हो जाता है। यानी औरतों का दर्द अर्जेंट नहीं होता, बल्कि इंतजार कर सकता है।’

झेंग ने पहला सेट टाईब्रेकर में 7-6 से इगा स्विटेक से जी  लिया था। उसके बाद स्विटेक ने लगातार दो सेटों 6-0, 6-2 से हराकर उन्हें टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। झेंग को मैच के दौरान मेडिकल टाइम भी लेना पड़ा।

मैच के बाद झेंग ने अपनी हार की वजह बताते हुए कहा, ‘चोट की वजह से मैं चिंतित नहीं थी। मैं पीरियड्स की वजह से ज्यादा परेशान थी। मैच से पहले ही यह प्रॉब्लम शुरू हुई थी। इसकी वजह से मैच के बीच में ही मुझे पेट में दर्द हो गया था। जिसे सहन करन पाना मेरे लिए मुश्किल था। पीरियड्स का पहला दिन था।

यह मेरे लिए हमेशा कठिन रहा है। पहले दिन मुझे हमेशा इतना दर्द होता है, पर मुझे खेलना ही पड़ता है। मैं नेचर के खिलाफ नहीं जा सकती हूं। काश मैं एक पुरुष होती, तो मुझे इसे झेलना नहीं पड़ता।’

झेंग ने दूसरे दौर में पूर्व वर्ल्ड नंबर वन और 2018 की चैंपियन सिमोना हालेप को 6-2, 6-2, 6-1 से हराते हुए बाहर का रास्ता दिखाया था।

स्विटेक फ्रेंच ओपन में लगातार तीसरी बार क्वार्टर फाइनल में पहुंची हैं। यह उनकी लगातार 32वीं जीत भी है। वे 23 अप्रैल के बाद पहली बार किसी सेट में हारीं हैं। झेंग से पहला सेट गंवाने से पहले उन्हें स्टुटगार्ट ओपन टेनिस के सेमीफाइनल में ल्यूडमिला सैमसोनोवा से सेट गंवाना पड़ा था।

लगातार तीसरी बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली इगा स्विटेक ने 19 साल की चीनी खिलाड़ी झेंग की तारीफ की। उन्होंने कहा- ‘मैं उसके शॉट्स से हैरान थी। उसने काफी अच्छे शॉट्स खेले, उसके लिए बहुत-बहुत बधाई। मैं पहले सेट में हार से निराश थी, उसके बाद वापसी कर बढ़त बनाने के बाद मैच जीतने में सफल होने पर खुश हूं।

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By Kajal Singh