गोरखपुर: 82 मासूमों के लापता होने का पुलिस सुराग लगाने में नाकाम, परिजनों का रो-रोकर..

गोरखपुर: 82 मासूमों के लापता होने का पुलिस सुराग लगाने में नाकाम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

गुमशुदा मासूम

गोरखपुर: पिछले कई महिनों से लगातार मासूमों के लापता होने की खबरों को सुन लोग बेहद परेशान हैं, पुलिस के पास जाते हैं तो गुमसुदगी की शिकायत दर्ज कर नोटिस चस्पा कर देती है। लेकिन यह अभी तक पता नहीं हो पाया है, कि आखिर ये मासूमों को कौन ले जाता है? कहाँ ले जाता है? और क्योम ले जाता है? अभी इन सभी सवालों का जवाब नहीं पता चल पाया है।

यह मामला यूपी के उसी गोरखपुर का है जो यूपी के मुखिया आदित्यनाथ योगी की कर्मभूमी है, जहाँ से लगातार 5 बार के सांसद व एक बार के विधायक हैं जो अपनी कार्यशैली से अपराधों को रोकने में माहिर माने जाते हैं। लेकिन वहीं उसी क्षेत्र में जब लगातार मासूमों के लगातार गुम होने की सूचना मिले और उनका सुराग लगाने में पुलिस नाकाम रहे तो सवाल उठने तो लाजमी हैं।

क्या बताते हैं पुलिस विभाग के आंकड़े ?

गोरखपुर मंडल के चार जिलों में आए दिन बच्चे लापता हो रहे हैं। तहरीर मिलने पर पुलिस पहले गुमशुदगी दर्ज करती है। फिर बच्चे की फोटो लेकर हुलिया और पहनावे का डिटेल लिखकर थानों की दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर देती है। लेकिन पुलिस उन्हें खोज पाने में नाकाम साबित हो रही है।

उधर! अपने घर के मासूम के लापता होने से उनके परिजन बेहद परेशान हैं। वे सोचसोच कर परेशान रहते हैं कि उनका मासूम बच्चा कहाँ होगा, कैसे होगा, क्या कर रहा होगा और उस पर क्या बीत रही होगी। पुलिस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज सहित मंडल के चार जिलों में हर दिन लगभग एक बच्चा या बच्ची लापता होती है।

गोरखपुर: वहीं अगर बड़ों के लापता होने की संख्या जोड़े तो हर दिन दो से तीन लोग लापता होते हैं। डीआईजी जे रविंदर गौड़ ने बताया कि बच्चों को तलाशने में पुलिस जुटी है। अलग से टीम भी बनाई गई है। जल्द ही बच्चों की बरामदगी की जाएगी।वहीं पुलिस सूत्रों की मानें तो कई बच्चे लापता होने के बाद बड़े शहरों में चले जाते हैं वहाँ दुकानों और अन्य जगहों पर काम करने लगते हैं। वहीं कुछ बच्चों को भीख मांगने वाले रैकेट में शामिल कर लिया जाता है। लेकिन एक तरह से पुलिस उन्हें बरामद करने में नाकाम ही रहती है।

देखिए कई बार गुम हुए मासूम कैसे मिलते हैं?

आपको बता दें कि ऐसा नहीं है कि पुलिस बच्चों को बरामद नहीं करती, लेकिन अधिकांश बरामद होने वाले बच्चे भगवान भरोसे मिल जाते हैं। जैसे कोई बच्चा गुम हुआ और संजोग से कहीं किसी आम नागरिक को मिल गया, तो वो पुलिस को सूचित कर देते हैं। जिसे पुलिस उनके परिजनों को तत्काल सौंप देती है, ऐसे मामलों में पुलिस गुमशुदगी भी दर्ज नहीं करती। एक माह पहले ही इंजीनियरिंग कॉलेज के पास एक लापता बच्चा दुकानदार को दिख गया, दुकानदार ने फोन कर पुलिस को बताया। जिसके बाद पुलिस ने उसके परिजनों की तलाश कर उसे सौंप दिया।

क्या बोले अखिलेश?

बच्चों के लापता होने की घटना पर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्ववीट कर लिखा है, कि अब यूपी में ख़ुद गुमशुदा पुलिस की तलाश के पोस्टर लगने बाक़ी हैं..

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By Rohit Attri

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