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Rajasthan Political Crisis: काँग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अब राजस्थान के सामान्य करने की रहेगी चुनौती, गहलोत रहेंगे सीएम या फिर जाएगी सत्ता

Rajasthan Political Crisis

Rajasthan Political Crisis: मल्लिकार्जुन खड़गे का काँग्रेस का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद अब राजनितिक गलियारों में एक नई चर्चा चल रही है कि राजस्थान में अब क्या होने वाला है?  राजनीतिक पंडितों की माने तो अब राजस्थान में भी सत्ता बदल सकती है। सवाल ये ही उठ रहा है कि नए अध्यक्ष राजस्थान को लेकर अब क्या फैसला लेने वाले है। गहलोत सीएम बने रहेंगे या फिर सचिन पायलट को सौपा जाएगी सत्ता…

Rajasthan Political Crisis: दरअसल, गहलोत की राजस्थान में सरकार होने के बावजूद अस्थिरता का माहौल है। जगजाहिर है कि सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच नें मतभेद के साथ मनभेद भी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव होने से पहले से ही राजस्थान में गहलोत सरकार की हालत पतली थी। ऐसा लग रहै था कि गहलोत सरकार कभी भी गिर सकती है। काँग्रेस हाईकमान के लिए भी गहलोत- पायलट विवाद सिर दर्द साबित हो रहा था। विवाद को सुलझाने के लिए सोनिया गाँधी ने अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को ही जिम्मेदारी सौपी थी।

माना ये भी जा रहा है कि गहलोत के पक्ष में अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे के पक्ष में नज़र आए थे। लगता तो ये ही है कि नए अध्यक्ष का झुकाव गहलोत की तरफ होने के कारण जानकार मान कर चल रहे है कि शायद ही गहलोत को बदला जाएं।

Rajasthan Political Crisis: इसके पीछे ये भी एक सोच होगी कि अब राजस्थान में गहलोत सरकार का कार्यकाल केवल एक साल का ही बचा है और मल्लिकार्जुन खड़गे कोई रिस्क नहीं लेना चाहेंगे। चूकि खड़गे जानते है कि गहलोत को ही सीएम बनाने के पक्ष में राजस्थान के 90 से 95 विधायक। उस वक्त आलाकमान के दो टूक निर्देश पर सीएम गहलोत ने अध्यक्ष चुनाव लड़ने का फैसला वापस लिया और वो सीएम बने रहे।

खड़गे यदि गहलोत का साथ देते हुए उन्हें सीएम पद पर बरकरार रखते हैं तो पायलट खेमा नाराज होकर पार्टी छोड़ देगा और शायद भाजपा का दामन थाम ले। भाजपा ने भी अंदरूनी तौर पर इसकी तैयारी कर रखी है। वहीं दूसरी ओर यदि एक साल के लिए पायलट को सीएम बनाया जाए तो यह बात गहलोत कतई स्वीकार नहीं करेंगे। आखिर इस पद पर बने रहने के लिए ही तो उन्होंने पार्टी का राष्ट्रीय पद छोड़ दिया।

Rajasthan Political Crisis: सचिन भी इस बात की उम्मीद लगाए बैठे थे कि नया अध्यक्ष बनने के बाद उनके राजनीतिक जीवन में भी अच्छे दिन जरूर आएंगे। शायद यही वजह रही कि खड़गे की जीत होते ही सबसे पहले बधाई देने पहुंच गए।

इनके बाद सीएम गहलोत और सूबे के अन्य नेताओं ने खड़गे से मुलाकात कर बधाई दी। नए अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजस्थान के विवाद को सुलझाने की होगी। वो कैसे गहलोत और पायलट को समझा पाएंगे ये देखना दिलचस्प होगा।

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By Atul Sharma

बेबाक लिखती है मेरी कलम, देशद्रोहियों की लेती है अच्छे से खबर, मेरी कलम ही मेरी पहचान है।

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